साजा व्यवहार न्यायालय को शहर से 3किलोमीटर दूर करने के फरमान पर अब सभी वर्ग विरोध में उतरे,








साजा –नगर साजा मुख्यालय में स्थित व्यवहार न्यायालय के स्थान को परिवर्तन करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है ,ग्राम डोंगीतराई में किसानों के पशुओं के लिए सुरक्षित चरागन स्थान में भवन बनाकर व्यवहार न्यायालय को शिफ्ट करने वाली खबर पर विरोध के स्वर मुखर होने लगा है,राजस्व विभाग के द्वारा की जा रही भूमि स्थानांतरण की प्रक्रिया पर आम लोगो के साथ जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।


*नगर में आबंटित भूमि के बावजूद दूसरे जगह ले जाने का हो रहा विरोध*


साजा नगर पंचायत के खसरा नंबर 3655/4 के रकबा 0.5900 हेक्टेयर सिंचित भूमि जो की पूर्व में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के नाम से व्यवहार न्यायालय भवन हेतु आबंटित है जिसके लिए राशि भी स्वीकृत की जा चुकी है जबकि राजस्व विभाग द्वारा इस मामले में मौका मुआयना भी कर रखा है,लेकिन अचानक ही साजा नगर मुख्यालय से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम डोंगीतराई में न्यायालय के शिफ्टिंग की प्रक्रिया बढ़ाई जाएगी ऐसा किसी ने सोचा हो नही था,मामले में अब लोगो का बढ़ता आक्रोश चर्चा का विषय है।


*ग्रामीणों के विरोध को किया जा रहा नजर अंदाज*


व्यवहार न्यायालय को जिस स्थान पर शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया है उसके लिए ग्रामीणों ने तहसीलदार साजा को लिखित में आवेदन देकर आपत्ति किया है, ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीणों के पूर्वजों द्वारा सुरक्षित की गई चरागन भूमि पर न्यायालय भवन नही बनने दे सकते।


*खसरा नंबर बदलकर त्रुटिपूर्ण सीमांकन करने का आरोप*


इसके अलावा ग्राम के किसान चंद्रप्रकाश कन्नौजे ने राजस्व अधिकारियों पर उसके निजी स्वामित्व खसरा नंबर 592 वाली भूमि को खसरा नंबर 690 के रूप में त्रुटिपूर्ण सीमांकन किए जाने का आरोप लगाया है। इसके अलावा ग्रामीणों ने बताया कि न्यायालय भवन बनने से आसपास की भूमि भी उनकी काम की नही रह जायेगी,पशु मालिको के लिए चरागन और आम निस्तारी की जगह समाप्त हो जायेगी,जिला कलेक्टर से इस विषय में शिकायत करने का मन बना चुके ग्रामीणों ने साफ तौर पर कहा है की राजस्व अधिकारियों की मनमर्जी नही चलने देंगे।


*अधिवक्ता संघ का भारी विरोध*


नय्यालय को अन्य ग्राम में ले जाने की प्रक्रिया का साजा अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष मूलचंद शर्मा के अलावा अधिवक्ता अजय कुमार गोस्वामी,दिनेश कुमार साहू,वरिष्ठ अधिवक्ता में विनोद शर्मा,मनोज राजपूत,गोकुल राजपूत,मनोज कुमार वर्मा, उपेन्द्रधर दीवान,विजय जोशी,पुरुषोत्तम चौबे, हरिशरण क्षत्रिय,अजय कुमार देवांगन, केके वैष्णव,जितेंद्र साहू,श्रीमती कविता गोस्वामी,अवधेश शर्मा,मनोज पंडित,चंद्र प्रकाश कन्नौज़े के अलावा स्टाम्प वेंडर लच्छी साहू,भुवन नेगी,भारत राम वर्मा,नरपत सिंह,मन्नू लाल रात्रे एवं अन्य दस्तावेज लेखकों ने मामले आपत्ति दर्ज की है।

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