धान शार्टेज मामले में कार्यवाही के नाम पर खाना पूर्ति
असली जिम्मेदार को कार्यवाही से मिला अभयदान
विपण संघ,नोडल,प्राधिकृत अधिकारियों पर आखिर कार्यवाही क्यों नही किया गया
छोटे कर्मचारियों को निलंबित कर बनाया बली का बकरा
साजा- जिले के सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य पर किसानों के खरीदे गए धान में समितियों से अब तक उठाव परिवहन की समुचित व्यवस्था नही होने के कारण धान की मात्रा में व्यापक कमी होने लगी है समितियों ने किसानों से उनके धान की खरीदी 1 नवंबर से प्रारंभ कर दिया था सभी समितियों ने हजारों क्विंटल धान की खरीदी किया परंतु खरीदे गए धान का उठाव परिवहन समय पर नही हुआ बल्कि आज पर्यन्त तक जिले के कई ऐसे समिति है जहा अब तक फड़ में धान उठाव का बांट जोह रही है जबकि खरीदी पूर्व समिति और विपणन संघ के मध्य अनुबंध होता हे की बफर लिमिट से कही अधिक मात्रा में खरीदी केंद्र में धान होने की स्थिति में विपणन संघ उस धान को 72 घंटे के भीतर परिवान उठाव सुनिश्चित करेगा परंतु इस अनुबंध का पालन कही भी नाम मात्र नही होता ज्ञात हो की शासन द्वारा किसानों से खरीदी किए जाने वाले धान को लेकर नमी तय की गई है जिसमे 17 प्रतिशत नमी तक के किसानों के धान को खरीदी किया जाना तय होता है ऐसे में सवाल यह उठता है कि 17 प्रतिशत नमी युक्त धान को खुले आसमान के नीचे महीनो रखने के बाद उसमे सुखद आना तय है अब इस मात्रा की कमी को लेकर ऐसी कोई व्यवस्था शासन से नही हे जिसकी भरपाई की जा सके ऐसे में समितियों में खरीदे गए धान की मात्रा में कमी होना स्वाभाविक है वही खरीदी किए धान की मात्रा में कमी को लेकर प्रथम दृष्टया सबसे बड़े जिम्मेदार और दोषी मार्कफेड है यदि विपणन संघ अनुबंध का पालन करते हुए समय पर समितियों से धान के परिवहन उठाव की समुचित व्यवस्था करे तो ऐसी नौबत नही आती वही समितियों में धान खरीदी व्यवस्था का सूक्ष्म निगरानी करने में विभाग के नोडल अधिकारी समितियों के प्राधिकृत अधिकारी भी बराबर के जिम्मेदार है इन अधिकारियों ने कुर्सी और अपने दफ्तर के एयर कंडीशन का मोह छोड़ खरीदी केंद्रों में समय समय पर जाकर व्यवस्था को देखा होता तो शायद समितियों को हुए इतने बड़े नुकसान से बचाया जा सकता था बहरहाल धान खरीदी व्यवस्था को लेकर सबसे बड़े दोषी विपणन संघ नोडल अधिकारी समितियों के प्राधिकृत अधिकारी है जिले में समितियों में धान शार्टेज को लेकर पिछले दिनों कलेक्टर के द्वारा तीन समितियों के प्रबंधकों कम्प्यूटर ऑपरेटरों के विरुद्ध निलंबन की कार्यवाही की गई है पर कलेक्टर के इस कार्यवाही को लेकर बड़ा सवाल उठने लगा है की आखिर प्रबंधक और ऑपरेटर ही धान शार्टेज के लिए जिम्मेदार है आखिर इस मामले के मुख्य जिम्मेदारों और किरदारों पर कार्यवाही क्यों नही की जा रही क्यों कार्यवाही से इन्हे बचाकर अभयदान दिया जा रहा छोटे छोटे गरीब कर्मचारियों को निलंबित कर बली का बकरा बनाया गया जबकि असली जिम्मेदार कार्यवाही से बचकर आनंद का जीवन जी रहे।


