बेमेतरा साजा–तस्वीर को देख अंदाजा लगा सकते है कि कैसे एक मां अपनी दुधमुंही बच्ची की जान जोखिम में डाल आधे अधूरे निर्माण को पार कर रहे है,जी हां ये विडंबना है कि लगभग 3 वर्षो में 100 मीटर पुल अब तक अधूरा ही है। आपको बता दे कि साजा के ग्राम मौहाभाठा–अतरझोला नाला में बन रहा पुल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया,बरसात में आवागमन पूरी तरह बंद है,थोड़े पानी में ही नाले के ऊपर पानी के बहाव तेज हो जाता है राज्य गठन के बाद कांग्रेस सरकार सत्ता में आने की बाद लगा कि अब इस नाले का उद्धार होगा ऐसा हुआ भी लेकिन ठेकेदार ने मंत्री चौबे के गृह ग्राम के पुल पर ही गफलत की कालिख पोत दी है जिससे विपक्षी दल को बैठे बिठाए मुद्दा मिल गया है ।
*मनमानी कार्य करके लाखो रुपए का बंदरबाट करने के साथ अधूरा निर्माण करने वाले ठेकेदार के साथ संबंधित विभाग भी उतना ही जिम्मेदार है जितना कि ठेकेदार लेकिन अब तक उक्त दोषी पर कार्यवाही नही हुई है ये भी प्रशासनिक लचरता का उदाहरण है। इसे विडंबना ही कह सकते है कि जहां मंत्री चौबे प्रत्येक व्यक्ति दर्द का साथी बन रहे लेकिन उक्त ठेकेदार ने पुल के अधूरे कार्य से उनके साफ स्वच्छ छवि पर विरोधियों को बोलने का अवसर दे दिया है। फिलहाल तो नही लगता कि कुछ महीनो और इस पुल का कायकल्प होने वाला है, चुनावी शंखनाद होने से कार्य प्रभावित होगा लेकिन ठेकेदार पर कार्यवाही की मांग कर रहे जनता चाहते है की किसी तरह पुल पार आवागमन शुरू हो जाए।

