साजा- प्रदेश के सियासी राजनीति में नाम शुमार कर चुके साजा विधान सभा क्षेत्र अब पूरी तरह से किसी परिचय का मोहताज नही इस विधानसभा के नाम की गूंज सम्पन्न विधानसभा चुनाव के दौरान पूरे देश में गूंजने लगी और राष्ट्रीय नेताओं जिसमे स्वयं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित शाह सहित तमाम आला नेताओं के जुबान तक पंहुचकर साजा ने सुर्खिया बटोर लिया और इसके बाद तो जैसे ही चुनाव परिणाम सामने आए मानो साजा के नाम उस परिणाम ने और गर्दिश में पहुंचा दिया ज्ञात हो कि संपन्न चुनाव में एक तरफ जहा कांग्रेस के कद्दावर नेता और 7 बार विधायक अविभाजित मध्यप्रदेश सहित छत्तीसगढ़ में ओहदेदार मंत्री पद पर रहे रविंद्र चौबे जैसे राजनीति के बादशाह से भाजपा ने मुकाबले में एक गरीब मजदूर वर्ग से ताल्लुक रखने वाले ईश्वर साहू ग्राम बिरनपुर को प्रत्याशी घोषित कर सबको चौंकाया था ईश्वर साहू के टिकिट को तय किया गया तब लोगो ने यह कयास लगाना शुरू कर दिया था की हर तरफ से कमजोर ईश्वर की रविंद्र चौबे के हाथो बड़ी हार सुनिश्चित है परंतु नीति को कुछ और ही मंजूर था बीते कुछ माह पूर्व ग्राम बिरनपूर में हुए घटना का ऐसा असर चुनाव में होगा ये किसी ने सोचा नही था इस घटना में ईश्वर साहू के पुत्र भुनेश्वर की नृंस हत्या ने धार्मिक और जातिवाद का रूप धारण कर लिया और एक समुदाय विशेष को लेकर जो भावना भड़की उसे भाजपा ने सफलता पूर्वक मुद्दा बनाकर साजा में राजनीति की शतरंज खेला और सफलता पाया ज्ञात हो कि इस घटना को लेकर कांग्रेस ने ऐसी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और तो और तत्कालीन विधायक और प्रदेश के केबिनेट मंत्री रविंद्र चौबे का घटना से लेकर अब तक पीड़ित परिवार और ग्राम में नही पहुंचना उनके लिए सबसे बड़ी नुकसान का कारण बना जिसका विश्लेषण समय रहते कांग्रेस नही कर पाई वही घटना में जवान पुत्र को खो चुके ईश्वर को जब सरकार ने 10 लाख रुपए नगद और परिवार के एक सदस्य को नौकरी का मदद देने की घोषणा की तब ईश्वर ने इसे लेने से मना कर अपनी मंशा को बता दिया था बहरहाल भाजपा की रणनीति सफल हुई और ईश्वर ने राजनीति के युद्ध में बल शाली योद्धा को परस्त कर जमीन और दिन में तारे दिखा दिया अब सवाल यह उठता है को अनुभव से कमजोर ईश्वर इस जिम्मेदारी पर किस हद तक फिट बैठते है क्योंकि जनता की उम्मीद पूरी करना क्षेत्र में विकास एक तरह से लोहे के चने चबाने के समान है लेकिन ईश्वर के लिए सबसे बड़ी चुनौती साजा की प्रशासनिक ढांचा होगी जहा वर्षो से आंगद बन पैर गड़कर बैठे अधिकारी कर्मचारी साजा में नए विधायक के विकाश में सबसे बड़े अवरोधक है साजा में बिगड़ी प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करना अत्यंत आवश्यक है और इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी आंगद बने प्रशासन के पैर उखाड़ना होगा तब कही जाकर नए विधायक साजा में विकास और जन अपेक्षा को गति दे पाएंगे अब यह सवाल उठता की विधायक ईश्वर इस पर कितना खरा उतरते है यह आने वाला समय तय करेगा।
प्रशासनिक आंगदो के पैर उखाड़ने होगी नए विधायक के लिए चुनौती सत्ता परिवर्तन का असर देखने जनता लालायित मुख्यालय के तमाम सरकारी विभागों में व्याप्त अधिकारी राज से जनता त्रस्त क्या नव निर्वाचित विधायक ईश्वर साहू बदल पाएंगे साजा की फिजा
byTumesh Kumar
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